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श्री सत्यनारायण व्रत कथा और आरती: संपूर्ण 5 अध्याय और पूजा विधि (Shri Satyanarayan Katha)

  हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए श्री सत्यनारायण व्रत कथा को सबसे उत्तम, कल्याणकारी और शीघ्र फलदायी माना गया है। स्कंद पुराण के रेवाखंड से ली गई यह पावन कथा कलियुग में मनुष्यों को सभी कष्टों, दरिद्रता और मानसिक दुखों से मुक्ति दिलाकर सुख-समृद्धि प्रदान करती है। यदि आप भी अपने घर में सुख, शांति और धन-धान्य की वृद्धि चाहते हैं, तो इस लेख में सत्यनारायण भगवान की संपूर्ण कथा (5 अध्याय) , पूजा के नियम, सही समय और आरती की पूरी जानकारी विस्तार से दी गई है। 1. श्री सत्यनारायण पूजा के मुख्य नियम और शुभ समय (Rules & Muhurat) भगवान सत्यनारायण (सत्य ही नारायण हैं) की पूजा जितनी सरल है, उतनी ही प्रभावशाली भी है। लेकिन इसका पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसे सही नियमों के साथ किया जाए: सर्वोत्तम तिथियां (Best Days): यह कथा और व्रत किसी भी महीने की पूर्णिमा (Purnima) , शुक्ल पक्ष की एकादशी , मास संक्रांति या किसी भी गुरुवार (Thursday) को करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसके अलावा गृह प्रवेश, विवाह या व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक अवसरों पर भी इसे अवश्य...
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Diwali 2026 Date: जानिए सही तारीख, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन क्या खरीदना होता है बेहद शुभ

Diwali 2026 Date in India: दीपावली सनातन धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र त्योहार है। इसे सुख, समृद्धि और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चन की जाती है। साल 2026 में दिवाली की तारीख और लक्ष्मी पूजा के मुहूर्त को लेकर लोगों में काफी असमंजस है। आइए जानते हैं कि इस साल दिवाली कब है (When is Diwali 2026) , लक्ष्मी पूजा का सही समय क्या है और वास्तु के अनुसार इस दिन कौन सी चीजें खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। साल 2026 में दिवाली कब है? (Diwali 2026 Date) हिंदू पंचांग और ड्रिक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, इस साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026, दिन रविवार को सुबह 11:27 बजे से शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे होगा। चूंकि दीपावली पर लक्ष्मी पूजा हमेशा प्रदोष काल और महानिशीथ काल (रात के समय) में की जाती है, इसलिए इस साल दीपावली का मुख्य त्योहार 8 नवंबर 2026 (रविवार) को ही पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। लक्ष्मी पूजा 2026 का ...

Zero Balance Account Opening Online 2026: घर बैठे मोबाइल से खोलें जीरो बैलेंस खाता, जानें 4 बेस्ट बैंक

आज के डिजिटल युग में बैंक के चक्कर काटने और लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत पूरी तरह खत्म हो चुकी है। अब आप अपने स्मार्टफोन की मदद से सिर्फ 5 मिनट में Zero Balance Account Online खोल सकते हैं। सामान्य बैंक खातों में आपको हर महीने ₹5,000 या ₹10,000 का मिनिमम बैलेंस रखना पड़ता है, लेकिन Zero Balance Account में ₹0 बैलेंस होने पर भी बैंक आपसे कोई पेनाल्टी या चार्ज नहीं वसूलता। इस लेख में हम आपको 2026 के 4 सबसे बेहतरीन बैंकों और ऑनलाइन खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताएंगे। 2. जीरो बैलेंस अकाउंट खोलने के मुख्य फायदे (Benefits) • कोई मिनिमम बैलेंस का झंझट नहीं: खाते में ₹0 होने पर भी आपका अकाउंट कभी बंद नहीं होगा। • फ्री वर्चुअल डेबिट कार्ड (Virtual Debit Card): ऑनलाइन शॉपिंग, Google Pay, PhonePe और Paytm चलाने के लिए आपको तुरंत फ्री डिजिटल एटीएम कार्ड मिल जाता है। • शानदार ब्याज दर (High Interest Rate): कुछ डिजिटल बैंक सामान्य बैंकों की तुलना में बचत खाते पर 7% तक का सालाना ब्याज देते हैं। • 100% पेपरलेस प्रोसेस: खाता खोलने के लिए किसी भी कागजी दस्तावेज को बैंक में...

NRI Mutual Fund Investment Rules 2026: प्रवासी भारतीय भारत में निवेश कैसे करें

"NRI Mutual Fund Investment Rules 2026" क्या आप एक प्रवासी भारतीय (Non-Resident Indian) हैं और भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं? आज के समय में दुनिया भर के देशों (जैसे कनाडा, यूएसए, यूएई और यूके) में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भारत के शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना चाहते हैं। लेकिन, टैक्स नियमों और सरकारी गाइडलाइंस की सही जानकारी न होने के कारण कई लोग शुरुआत नहीं कर पाते। इस विस्तृत गाइड में हम NRI Mutual Fund Investment Rules 2026 , आवश्यक दस्तावेजों और निवेश के सबसे आसान तरीकों के बारे में विस्तार से बात करेंगे। यह भी पढ़े:- Mutual Fund Investment Tips: म्यूचुअल फंड से करोड़पति कैसे बनें? जानिए SIP निवेश का सही तरीका और कम्पाउंडिंग का जादू क्या NRI भारत में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश कर सकते हैं? हाँ, फेमा (FEMA - Foreign Exchange Management Act) के नियमों के अनुसार, कोई भी प्रवासी भारतीय भारत के म्यूचुअल फंड्स में पूरी तरह से कानूनी रूप से निवेश कर सकता है। हालांकि, उन्हें सामान्य भारतीय नागरिकों की तुलना में कुछ...

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दुर्गा सप्तशती पाठ 4 चतुर्थ अध्याय || by geetapress gorakhpur ||p

 ॥ श्री दुर्गा सप्तशती ॥ चतुर्थोऽध्यायः इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवी की स्तुति ॥ध्यानम्॥ ॐ कालाभ्राभां कटाक्षैररिकुलभयदां मौलिबद्धेन्दुरेखां शड्‌खं चक्रं कृपाणं त्रिशिखमपि करैरुद्वहन्तीं त्रिनेत्राम्। सिंहस्कन्धाधिरूढां त्रिभुवनमखिलं तेजसा पूरयन्तीं ध्यायेद् दुर्गां जयाख्यां त्रिदशपरिवृतां सेवितां सिद्धिकामैः॥ सिद्धि की इच्छा रखनेवाले पुरुष जिनकी सेवा करते हैं तथा देवता जिन्हें सब ओर से घेरे रहते हैं, उन ‘जया ’ नामवाली दुर्गादेवी का ध्यान करे । उनके श्रीअंगों की आभा काले मेघ के समान श्याम है । वे अपने कटाक्षों से शत्रुसमूह को भय प्रदान करती हैं । उनके मस्तक पर आबद्ध चन्द्रमा की रेखा शोभा पाती है । वे अपने हाथों में शंख, चक्र, कृपाण और त्रिशूल धारण करती हैं । उनके तीन नेत्र हैं । वे सिंह के कंधेपर चढ़ी हुई हैं और अपने तेज से तीनों लोकोंको परिपूर्ण कर रही हैं । "ॐ" ऋषिरुवाच*॥१॥ शक्रादयः सुरगणा निहतेऽतिवीर्ये तस्मिन्दुरात्मनि सुरारिबले च देव्या। तां तुष्टुवुः प्रणतिनम्रशिरोधरांसा वाग्भिः प्रहर्षपुलकोद्‌गमचारुदेहाः॥२॥ ऋषि कहते हैं - ॥१॥ अत्यन्त पराक्रमी दुरात्मा महिषासुर तथा उसक...

दुर्गा सप्तशती पाठ 12 द्वादश अध्याय || by geetapress gorakhpur ||

  ।। श्री दुर्गा सप्तशती ॥ द्वादशोऽध्यायः देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म् ॥ध्यानम्॥ ॐ विद्युद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभिः करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं बिभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे॥ मैं तीन नेत्रोंवाली दुर्गादेवी का ध्यान करता हूँ, उनके श्रीअंगों की प्रभा बिजली के समान है । वे सिंह के कंधेपर बैठी हुई भयंकर प्रतीत होती हैं । हाथों में तलवार और ढ़ाल लिये अनेक कन्याएँ उनकी सेवा में खड़ी हैं ।वे अपने हाथों में चक्र, गदा, तलवार, ढ़ाल, बाण, धनुष, पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किये हुए हैं । उनका स्वरूप अग्निमय है तथा वे माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण करती हैं । "ॐ" देव्युवाच॥१॥ एभिः स्तवैश्च् मां नित्यं स्तोष्यते यः समाहितः। तस्याहं सकलां बाधां नाशयिष्याम्यसंशयम्*॥२॥ देवी बोली- ॥१॥ देवताओं ! जो एकाग्रचित होकर प्रतिदिन इन स्तुतियों से मेरा स्तवन करेगा, उसकी सारी बाधा निश्चय हीं दूर कर दूँगी ॥२॥ मधुकैटभनाशं च महिषासुरघातनम्। कीर्तयिष्यन्ति ये तद्वद् वधं शुम्भनिशुम्भयोः॥३॥ जो मधुकैटभ का नाश, महिषा...

दुर्गा सप्तशती पाठ 11 एकादश अध्याय || by geetapress gorakhpur ||

  ॥ श्री दुर्गा सप्तशती ॥ एकादशोऽध्यायः देवताओं द्वारा देवी की स्तुति तथा देवी द्वारा देवताओं को वरदान ॥ध्यानम्॥ ॐ बालरविद्युतिमिन्दुकिरीटां तुङ्‌गकुचां नयनत्रययुक्ताम्। स्मेरमुखीं वरदाङ्‌कुशपाशाभीतिकरां प्रभजे भुवनेशीम्॥ मैं भुवनेश्वरी देवी का ध्यान करता हूँ । उनके श्रीअंगों की आभा प्रभात काल के सुर्य के समान है और मस्तक पर चन्द्रमा का मुकुट है । वे उभरे हुए स्तनों और तीन नेत्रों से युक्त हैं । उनके मुख पर मुस्कान की छटा छायी रहती है और हाथों में वरद, अंकुश, पाश एवं अभय - मुद्रा शोभा पाते हैं । "ॐ" ऋषिरुवाच॥१॥ देव्या हते तत्र महासुरेन्द्रे सेन्द्राः सुरा वह्निपुरोगमास्ताम्। कात्यायनीं तुष्टुवुरिष्टलाभाद्* विकाशिवक्त्राब्जविकाशिताशाः*॥२॥ ऋषि कहते हैं - ॥१॥ देवी के द्वारा वहाँ महादैत्यपति शुम्भ के मारे जाने पर इन्द्र आदि देवता अग्नि को आगे करके उन कात्यायनी देवी की स्तुति करने लगे । उस समय अभीष्ट की प्राप्ति होने से उनके मुख कमल दमक उठे थे और उनके प्रकाश से दिशाएँ भी जगमगा उठी थीं ॥२॥ देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वंक त्वमीश्व...

हनुमान चालीसा और आरती, बजरंग बाण श्रीं राम स्तुति || hanuman Chalisa ||

Hanuman Chalisa or Aarti:  मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, इससे शनि जनित पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है, (चाहे शनि की ढैय्या हो या साढ़ेसाती) । इन दिनों में हनुमान जी के मंदिरों में जाकर भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं साथ ही इनका प्रिय बूंदी का प्रसाद चढ़ाते हैं। बजरंगबली को संकटमोचक भी कहा जाता है क्योंकि ये अपने भक्तों के सभी संकट दूर कर देते हैं। शास्त्रों और पुराणों अनुसार हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करके आरती करे और हनुमानजी को बूँदी का भोग लगाए. आइए शुरू करे हनुमान चालीसा का पाठ -    दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।    चौपाई :   जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।     महाबीर बिक्रम बजरंग   कुमति निवार सुमति के संगी ।।   कंचन बरन बिराज सुबे...