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धारी देवी मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी // Maa Dhari Devi //

माँ धारी देवी उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी हिंदू मंदिर है. इन्हें उत्तराखंड की रक्षक देवी और चार धामों (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) की संरक्षक शक्ति के रूप में पूजा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ धारी देवी को देश के 108 शक्ति स्थलों में से एक माना गया है. 1. मंदिर की अवस्थिति और स्वरूप (Location & Form) स्थान: यह भव्य मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कल्यासौड़ नामक स्थान पर स्थित है, जो श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच पड़ता है.   माँ काली का स्वरूप: माँ धारी देवी को साक्षात देवी काली का रूप माना जाता है.   कटी हुई मूर्ति का रहस्य: मंदिर में माता की मूर्ति का केवल ऊपरी आधा भाग (सिर वाला हिस्सा) विराजमान है. मान्यता है कि माता की मूर्ति का निचला आधा भाग (धड़) रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ मंदिर में स्थापित है, जहाँ उनकी माँ कालिका के रूप में पूजा होती है.   2. चमत्कारी रहस्य: दिन में तीन बार रूप बदलना माँ धारी देवी मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि यहाँ स्थापित पाषाण प्रतिमा ...
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Smart PDS 2.0 पोर्टल के माध्यम से अपने राशन कार्ड में नए सदस्य का नाम जोड़ने की प्रक्रिया

  Smart PDS 2.0 पोर्टल के माध्यम से अपने राशन कार्ड में नए सदस्य का नाम जोड़ने की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। आप नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके ऑनलाइन नाम जोड़ सकते हैं:    आवश्यक दस्तावेज (Documents Required) आवेदन शुरू करने से पहले ये दस्तावेज अपने पास तैयार रखें: नए सदस्य का आधार कार्ड जन्म प्रमाण पत्र (यदि बच्चा है) या विवाह प्रमाण पत्र (यदि शादी के बाद पत्नी का नाम जोड़ना हो) मौजूदा राशन कार्ड मुखिया के साथ नया सदस्य का पासपोर्ट साइज फोटो   ऑनलाइन नाम जोड़ने की प्रक्रिया ( Step-by-Step Process) पोर्टल पर लॉग इन करें: सबसे पहले अपने राज्य के Smart PDS 2.0 पोर्टल पर जाएं। आप राशन कार्ड नंबर, पंजीकृत मोबाइल नंबर या आधार नंबर और ओटीपी (OTP) के जरिए लॉग इन कर सकते हैं। (नोट: पुराने राशन कार्ड धारकों को कभी-कभी मोबाइल नंबर नॉट रजिस्टर्ड का एरर आ सकता है, क्योंकि पुराना डेटा पोर्टल पर अपडेट हो रहा होता है)  'Add Member' विकल्प चुनें: लॉग इन करने के बाद, डैशबोर्ड पर बाएं हाथ (Left Side) के मेनू में "RC Application" या "Modify RC" के अंतर्गत "Add Member...

पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए

 पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए....? सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है - इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक "पात्र" बन जाते हैं। इसलिए इस दौरान भोजन का नियम सबसे कठोर है। भाग 1 - गरुड़ पुराण क्या कहता है - अन्न ही शरीर नहीं, अन्न ही मन है गरुड़ पुराण, प्रेत कल्प, अध्याय 17 और 33 में भगवान विष्णु, गरुड़ जी को समझाते हैं - "अन्नं ब्रह्म रसं विष्णुः भोक्ता देवो महेश्वरः।" अन्न ब्रह्मा है, उसका रस विष्णु है, और उसे खाने वाला जीव, स्वयं महेश है। इसलिए अन्न को कभी सामान्य मत समझो। और दूसरा श्लोक - "जैसा अन्न वैसा मन, जैसा पानी वैसी वाणी।" गरुड़ पुराण कहता है, अन्न के 3 दोष होते हैं, जो खाने वाले के अंदर चले जाते हैं - 1. जाति दोष - अन्न किसने उगाया? किस भाव से उगाया? अगर किसान ने लोभ, क्रोध से उगाया, तो वह भाव अन्न में आएगा। 2. निमित्त दोष - अन्न बनाते समय...

सुरकंडा देवी मंदिर की पूरी जानकारी Surkanda mata mandir

   सुरकंडा देवी मंदिर की पूरी जानकारी Surkanda Devi Temple उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में धनौल्टी–कद्दूखाल मार्ग पर स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह समुद्र तल से लगभग 2,756 मीटर (9,042 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है और 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।  पौराणिक महत्व हिंदू मान्यता के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए। माना जाता है कि इस स्थान पर माता सती का सिर (सुर) गिरा था, इसलिए इसका नाम "सुरकंडा" पड़ा।  मंदिर की विशेषताएँ यह देवी शक्ति को समर्पित प्रमुख सिद्धपीठ है। मंदिर से हिमालय की अनेक चोटियों जैसे गंगोत्री, केदारनाथ और बंदरपूंछ के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। नवरात्रि और गंगा दशहरा के समय यहाँ विशेष मेले और पूजा का आयोजन होता है।  कैसे पहुँचें? सड़क मार्ग देहरादून से लगभग 65–70 किमी मसूरी से लगभग 40 किमी ऋषिकेश से लगभग 110 किमी कद्दूखाल तक सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।  रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन: Dehra...